India–US Trade Deal: Agriculture क्षेत्र के लिए क्या बदलेगा?
India US Trade Deal: Agriculture
India–US Trade Deal में agriculture sector को लेकर क्या तय हुआ? tariffs, market access और Indian farming पर पूरा analysis।
India और United States के बीच हुआ नया भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सिर्फ रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं है, इसका प्रत्यक्ष प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्या समझौते के तहत भारत ने अपने कसकर विनियमित कृषि बाजार को सीमित स्तर तक खोलने पर सहमति दी है।
ये डील दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रही है व्यापार तनाव को कम करने और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मन जा रहा है।
क्या व्यापक व्यापार समझौते के तहत भारत, अमेरिका से पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, विमान, दूरसंचार और फार्मास्युटिकल उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद होगी। कुल प्रतिबद्धता $500 बिलियन से ज्यादा बताई जा रही है।
इसके बदले में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले टैरिफ को काफी हद तक कम कर दिया है। अब भारतीय सामान पर अधिकतम टैरिफ 18% तक रहेगा, जो पहले काई उत्पादों के लिए 50% तक था। क्या टैरिफ में कमी से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र में क्या बदलाव होगा?
कृषि मोर्चे पर सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत ने पूर्ण बाजार खोलने का विकल्प नहीं चुना है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, केवल चयनित कृषि उत्पादों को ही सीमित पहुंच दी जाएगी। इसका स्पष्ट उद्देश्य है कि भारतीय किसानों के हितों से समझौता न हो।
भारत पहले भी यूरोपीय संघ के साथ समान मॉडल का अनुसरण कर चूका है, जहां कृषि क्षेत्र को चुनिंदा रूप से खोला गया था। क्या दृष्टिकोण को विशेषज्ञ “नियंत्रित उदारीकरण” के नाम से देख रहे हैं।
अमेरिका का परिप्रेक्ष्य: निर्यात अवसर
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रॉलिन्स के अनुसार, आप अमेरिकी किसानों के लिए एक बड़ा अवसर पैदा करेंगे। भारत की बढ़ती आबादी और बढ़ती खाद्य मांग को देखते हुए, अमेरिका अपने कृषि उत्पादों के लिए भारत को एक रणनीतिक बाजार मानता है।
अनहोनी ये भी हाइलाइट किया कि 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। नया समझौता गैप को काम करने में मदद करेगा और ग्रामीण अमेरिका में आय वृद्धि को समर्थन करेगा।
भारतीय किसानों के लिए इसका मतलब क्या है?
भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए ये सौदा एक तत्काल खतरे से ज्यादा एक भविष्य का संकेत है। सरकार स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है कि वैश्विक व्यापार के साथ-साथ धीरे-धीरे एकीकृत होना अपरिहार्य है, लेकिन किसान संरक्षण के साथ।
Aane wale samay me भारतीय किसानों और कृषि-उद्यमियों को:
गुणवत्तापूर्ण उत्पादन
वैश्विक मानक
मूल्यवर्धित खेती
निर्यातोन्मुख फसलें
पर ज्यादा फोकस करना होगा।
आप अप्रत्यक्ष रूप से आधुनिक कृषि पद्धतियों और कृषि-बुनियादी ढांचे के विकास को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।
नेतृत्व और विशेषज्ञ प्रतिक्रियाएँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि मजबूत साझेदारी, वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए यह जरूरी है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को लेकर एक बड़ी सफलता बताई है।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को सिर्फ रीसेट नहीं करेगा, भविष्य में कृषि, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्रों में गहरे सहयोग का रास्ता खुल सकता है।
निष्कर्ष: कृषि उद्योग के लिए अगला कदम
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता स्पष्ट रूप से दिखता है कि भारत अपने कृषि क्षेत्र को चरण-दर-चरण वैश्विक बाजार के लिए तैयार कर रहा है। सीमित पहुंच का मॉडल ये सुनिश्चित करता है कि किसानों को अचानक दबाव का सामना करना पड़े।
कृषि उद्योग के हितधारकों के लिए ये सही समय है योजना, कौशल उन्नयन और बाजार की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का, क्योंकि भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की भूमिका और बड़ा होने वाला है।



