उत्तर प्रदेश में क्लस्टर फार्मिंग: 50% सब्सिडी के साथ किसानों की आय बढ़ाने की प्रभावी योजना
भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि राज्य है। यहाँ अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास सीमित भूमि, संसाधन और पूंजी होती है। ऐसे में पारंपरिक खेती से लागत तो निकल जाती है, लेकिन मुनाफा बहुत कम बचता है। इसी समस्या के समाधान के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार ने क्लस्टर फार्मिंग (Cluster Farming) को बढ़ावा देना शुरू किया है, जिसमें किसानों को 50% तक की सरकारी सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।
क्लस्टर फार्मिंग क्या है – सरल शब्दों में
क्लस्टर फार्मिंग का मतलब है –
जब एक ही गाँव या आसपास के क्षेत्र के कई किसान एक साथ मिलकर, एक जैसी फसल और एक जैसी तकनीक से खेती करते हैं, तो उसे क्लस्टर फार्मिंग कहा जाता है।
इस मॉडल में:
- किसान समूह बनाकर काम करते हैं
- खेती की योजना सामूहिक रूप से बनाई जाती है
- बीज, खाद, तकनीक और मार्केटिंग एक साथ होती है
- इससे लागत कम होती है और मुनाफा अधिक मिलता है।
उत्तर प्रदेश में क्लस्टर फार्मिंग की ज़रूरत क्यों पड़ी?
उत्तर प्रदेश के किसानों को लंबे समय से कुछ मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- छोटी जोत की जमीन
- मौसम की अनिश्चितता
- परंपरागत फसलों से कम आमदनी
- बाजार तक सीधी पहुँच न होना
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने यह महसूस किया कि यदि किसान समूह में आधुनिक तकनीक के साथ खेती करें, तो उनकी आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।
UP Govt की 50% सब्सिडी योजना – किसानों के लिए बड़ा सहारा
उत्तर प्रदेश सरकार, उद्यान विभाग और एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत क्लस्टर फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है।
इस योजना के अंतर्गत किसानों को:
- पॉलीहाउस / नेट हाउस निर्माण पर 50% तक सब्सिडी
- ड्रिप इरिगेशन और आधुनिक उपकरणों पर अनुदान
- तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण
- बैंक लोन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
👉 कई मामलों में किसान केवल 2 से 2.5 लाख रुपये लगाकर हाई-टेक खेती शुरू कर पा रहे हैं।
पॉलीहाउस आधारित क्लस्टर फार्मिंग – क्यों है ज्यादा फायदेमंद
न्यूज़ रिपोर्ट्स और सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सामने आया है कि पॉलीहाउस खेती क्लस्टर फार्मिंग का सबसे मजबूत आधार बन रही है।
पॉलीहाउस में:
- तापमान और नमी को नियंत्रित किया जाता है
- फसल मौसम पर निर्भर नहीं रहती
- रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है
इसमें उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें:
- रंगीन शिमला मिर्च (लाल, पीली)
- टमाटर
- खीरा
- जरबेरा और अन्य फूल
इन फसलों से किसान एक एकड़ में 12–15 लाख रुपये तक का वार्षिक मुनाफा कमा रहे हैं।
कृषक प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में समय-समय पर:
- दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम
- पॉलीहाउस तकनीक की जानकारी
- फसल प्रबंधन, रोग नियंत्रण
- मार्केटिंग और बिक्री रणनीति

Capto Biotech Cluster Farming Scheme
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को दी जा रही है। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य किसानों को सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक सोच देना है।
क्लस्टर फार्मिंग से किसानों को होने वाले प्रमुख लाभ
क्लस्टर फार्मिंग अपनाने से किसानों को:
- उत्पादन लागत में कमी
- फसल की गुणवत्ता में सुधार
- बाजार में बेहतर कीमत
- स्थायी और नियमित आय
- स्थानीय स्तर पर रोजगार
जैसे कई फायदे मिलते हैं।
कौन किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं?
इस योजना का लाभ:
- छोटे और सीमांत किसान
- प्रगतिशील किसान
- किसान उत्पादक संगठन (FPO)
- युवा किसान और एग्री उद्यमी
सभी उठा सकते हैं, बशर्ते वे समूह बनाकर खेती करने को तैयार हों।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भविष्य की खेती
आज यह स्पष्ट हो चुका है कि केवल पारंपरिक खेती से किसान की आय बढ़ाना मुश्किल है। क्लस्टर फार्मिंग, पॉलीहाउस और संरक्षित खेती ही वह रास्ता है, जिससे किसान:
- जोखिम कम कर सकते हैं
- उत्पादन बढ़ा सकते हैं
- और आत्मनिर्भर बन सकते हैं
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार की 50% सब्सिडी के साथ क्लस्टर फार्मिंग योजना किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। कम निवेश, सरकारी सहयोग और आधुनिक तकनीक के साथ किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।



